Read Horror Story in Hindi - Rahasyamayee Safar Part 3/60 | पढ़ें भूतों की कहानियां - रहस्यमयी सफर भाग - 3/60 | Dingdongdom Stories

 

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रहस्यमयी सफ़र (भाग- 3)

मेरे दिमाग मे कई तरह कि अटकलें चल रहीं थी तभी दरवाजे पर किसी ने knock करते हुए बोला, “O hello, कौन है अन्दर? यह क्या मज़ाक लगा रखा है? बार बार दरवाजा खोल के lock कर दे रहे हो! Please come outside, दूसरों को भी मौका दो।”

“अरे! यह तो विवेक पाण्डे sir कि आवाज है। अब तो बेटा अटल तू गया काम से। तुझे ज़रूर sir ने दरवाजे को खोलते वक़्त देख लिया होगा।”

अब तो मैं बी तरह से फंस गया था मेरी समझ मे कुछ भी नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ की तभी मैंने अपने ईष्ट देव भैरों बाबा का स्मरण किया और एकदम से शान्त उसी अवस्था मे बैठा रहा।

मेरी साँसे अब तेज हो चली थीं। शायद इस वक़्त का मेरा डर किसी horror scene से ज्यादा घातक और डरावनी हो चली थी। Situation ही ऐसी थी की मैं न चाहते हुए भी उस प्राणघातक जगह पर और समय व्यतीत करने को मजबूर हो गया।

“ओहह, बड़ा ही जाहिल किस्म का इंसान है। ऐसे भला कौन मज़ाक करता है।” यह कहते हुए पाण्डे sir वहाँ से बाहर चले गए। मैने भी सावधानी से दरवाजे को खोला और अपनी आँखों से सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए बाहर निकल गया। बाहर कोई भी मौजूद नहीं था। मैने राहत की सांस ली और घड़ी मे वक़्त देखा तो एकदम से चौंक गया, “अरे! मुझे यहाँ अन्दर 20 minute से भी ज्यादा time हो गया। अब मुझे जल्दी ली library जाना होगा।”

मैं जैसे ही library पहुंचा यह देख के surprised रह जाता हूँ कि वह भूरे बालों वाली लड़की नहीं दिख रही थी, जिससे मैं अनुमति ले कर गया था। जब मैने ध्यान से देखा तो एक लड़का सबसे आगे खड़ा था और ठीक उसके पीछे मुझे वह पतली-दुबली लड़की दिखी जो उस वक़्त line में ठीक मेरे पीछे ही लगी हुई थी। मैं दौड़कर गया और उस line में उसके आगे घुंसते हुए लग गया।

“What the hell? What are you doing? यह क्या तरीका है घुंसने का? तुम्हें नहीं लगता क्या कि तुम्हें line मे लगना चाहिए था?”

इस से पहले कि मैं जुबान खोलता उसके पीछे खड़े लड़के ने उसका पक्ष ले कर बोला, “भाई, यहाँ जीतने भी हैं ना सभी को जल्दी है। बेहतर होगा कि line मे लग जाओ।”

उसकी बात सुनते ही मैं मुड़ा और उस दधीचि कि हड्डी जैसी लड़की से बोला, “अरे! मुझे पहचाना नहीं क्या? मैं अभी तो...थोड़ी देर पहले….!”

मेरी बात वह लड़की बीच से काटते हुए बोली, “हाँ क्यों नहीं पहचानती हूँ ना? तुम मेरे बुआ के लड़के जो ठहरे!”

उसकी यह बात सुनते ही वहाँ आस पास जितनों ने उसकी बात सुनी सब के सब दाँत फाड़ कर हँसने लगे। मेरी इस तरह कि insult आज तक किसी भी लड़की ने नहीं कि थी। इस chassis जैसी body वाली लड़की के हाथो हुई insult मुझे पचाना नागवार गुजरा और मैं अपने दाँत पिसते हुए उस line के सबसे आखिरी मे फिर से लग गया।

“साली, खुद को समझती क्या है? भिंडी जैसी नाक है, खीरे के बीज कि तरह दाँत और भौंदी सी शक्ल ले कर खुद को समझती क्या है?”

मैं मारे गुस्से के जल भून गया था। अब मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था सिवाय अपनी बारी आने तक wait करने का। अभी मुश्किल से 2 minute भी नहीं गुजरे थे कि मैने देखा कि वह पतली दुबली लड़की अपने हाथों मे 6 मोटी-मोटी Books को अपनी बांस कि डंडियों जैसे हाथों से थामे हुए मेरी तरफ आ रही थी। 

शायद वह अब घर जा रही थी। जब वह थोड़ी और करीब आई तो मैने देखा कि उन भारी Books का भार उसकी नाजुक सी कमर पर पड़ रही थी लेकिन वह बलखाकर चलना नहीं छोड़ रही थी। यह देखकर अचानक मेरी हंसी निकाल गई।

मुझे हँसता देखा वह समझ गयी कि मैं इस बार भी उसे ही देखकर हंस रहा हूँ। इस बार वह मेरे करीब आई और बोली, “कैसा लगा आया मजा? उस टाइम भी मुझे देखा हँसे थे ना, अब लगे रहो फिर से line में।”

यह कहते उसने अपनी भिंडी जैसी नाक को टेढ़ी कि और जीभ को निकालते हुए मुंह को बिचका दिया और अपनी कमर को बलखाते हुए आगे निकाल गयी।

“ओहह! तो इस बंदरिया ने जानबूझ के मेरे साथ ऐसा किया। वह उस वक़्त का बदला ले रही थी और इस वजह से मुझे पहचानने से मना कर दिया था।”

उस वक़्त मेरा मन हो रहा था कि उसके हाथों से सारी बुक्स ले कर भाग जाऊँ। लेकिन मैं नहीं चाहता था कि पहले दिन ऐसी हरकत करूँ जिससे कि सबकी नजरों मे आ जाऊँ। मैं मन मारकर वहीं खड़ा रह जाता हूँ। 

“O! hello mister, पागल हो गए हो क्या? कभी इतनी सुन्दर लड़की नहीं देखी? सुबह तक यूँ ही देखने का इरादा है क्या?”

इस आवाज ने मेरी तंद्रा तोड़ी और मैं college वाले सपने से वापिस लौट आया देखा कि मेरी सीट पर वो लड़की बैठी हुई है और अपनी हथेली से दो बार चुटकी बजाती हुई बोली थी। मैं उसकी तरफ देखते हुए बोला,

“बात यह है कि आप जिस seat पर बैठी हो वह मेरी है।”

मेरी यह बात सुनकर वह इस बार थोड़ी सी झेंप गयी और बोली,

“ओहह! ऐसा है क्या? यह सीट नंबर 8 नहीं है क्या?”

“नहीं 8 नंबर सीट आपकी बगल वाली है जो इस वक़्त खाली है।”

“अरे तो उसमे कौन सी बड़ी बात है, खाली है तो तुम बैठ जाओ ना उस पर।”

“लेकिन मैने window seat देखकर ही bookings कि थी।”

मेरी यह बात सुनते हुए वो इस बार हँसते हुए बोली,

“अब रात में बाहर कौन सा view देखोगे जनाब?”

इस बार उसकी बात सुनकर मुझे हँसी आ गयी और हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला,

“बात यह है कि....।”

“बात यह है कि वह seat मेरी ही है कोई नहीं बैठने वाला उस सीट पर तो निश्चिंत हो कर सुबह तक पसर जाओ और मुझे disturb ना करो।”

मेरी बातों को वो फिर से बीच में काटते हुई बोली थी। उसकी अकडपन की तो दाद देनी होगी मेरी सीट ले कर मुझ पर ही धौंस झाड रही थी जैसे उसने ही मुझ पर एहसान किया हो।

मैं उसके बाजू वाले सीट पर आ कर बैठ गया। घड़ी मे देखा तो रात के 11:15 का वक़्त हो चला था। मैने जैसे ही अपने बैग से इयरफोन निकाला की तभी मेरे आँखों के आगे अंधेरा छा गया। चारो तरफ अंधेरा होने की वजह से कुछ दिख नहीं रहा था। मैं हड़बड़ाकर अपनी seat पर बैठ गया। मुझे इस बार अपनी seat पहले के मुक़ाबले ज्यादा गद्देदार लग रही थी। बड़ा ही अलग तरह का सुकून मिल रहा था जिसका ब्यां मैं शब्दों के माध्यम से नहीं कर सकता। तभी अचानक किसी की चीख ने सारा मज़ा किरकिरा कर दिया।

“What the hell? Behave yourself mister॰”

यह आवाज मेरे कानों के पीछे से बहुत तेज आई थी और इस से पहले में कुछ समझ पाता bus मे lights जल चुकी थी। बस के सभी यात्री मुझे ऐसे निहार रहे थे जैसे उन्होने किसी चोर को पकड़ लिया हो। तभी मुझे किसी ने पीछे से आगे धक्के देते हुए कहा,

“अरे हद है तुमने तो बदतमीजी की हद कर दी है। ऐसा कोई करता है क्या?”

मैने पीछे घूमकर देखा तो मैं बिलकुल ही चौंक गया, मैं अचानक अंधेरे होने की वजह से उस लड़की के गोद में बैठ गया था। जिसकी वजह से वह लड़की झुँझला गयी थी और पूरा राशन पानी ले कर मुझ पर चढ़ गयी थी। इस से पहले की बात और आगे बढ़ती मैने माहौल को शांत करने की कोशिश की और कहा

“Oh! I am really very, very sorry. Actually बस मे अचानक अंधेरा हो गया जिसकी वजह से मैं गलती से यहाँ बैठ गया।”

मेरी बात सुनते ही सभी एक साथ खिलखिलाकर हंसने लगे। उनकी हंसी से कहीं न कहीं मुझे यह भी सुकून था की शायद अब वह लड़की के भी समझ आ गया होगा की मैंने यह जानबूझ के नहीं किया था। लेकिन मेरा यह सोचना बिल्कुल ही निराधार साबित हुआ जब मैने देखा कि वह लड़की अब भी मुझे गुस्से से मेरी और निहारे जा रही थी। उसने अपनी गुस्से से अपनी दोनों आँखें चढ़ा ली थी और अपनी नाक से ज़ोर से हवा निकालते हुए तेज तेज साँसे ले रही थी। 

“तुम्हें seat और किसी लड़की कि गोद मे कोई फर्क नजर नहीं आया क्या?”

“नहीं...सच मे मुझे कुछ अलग तो लगा था लेकिन मुझे नहीं पता था कि मैं....”